अपने संबोधन में राष्ट्रपति ने कहा कि भारतीय परंपरा में ‘आरोग्य’ यानी समग्र स्वास्थ्य को सबसे बड़ा सुख माना गया है। उन्होंने कहा कि किसी भी राष्ट्र की मजबूती उसके नागरिकों के स्वास्थ्य पर निर्भर करती है। यदि लोग शारीरिक, मानसिक और सामाजिक रूप से स्वस्थ होंगे, तो देश स्वतः सशक्त बनेगा। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि देशवासियों को स्वस्थ रखने में आयुष चिकित्सा पद्धतियों ने सदियों से अमूल्य योगदान दिया है।
राष्ट्रपति ने कहा कि योग, आयुर्वेद और सिद्ध जैसी पारंपरिक प्रणालियां उस समय से लोगों की सेवा कर रही हैं, जब आधुनिक चिकित्सा पद्धतियां प्रचलन में नहीं थीं। उन्होंने बताया कि हमारे खेतों, रसोई घरों और जंगलों में औषधीय पौधों और जड़ी-बूटियों का बहुमूल्य भंडार मौजूद है। इस प्राकृतिक संपदा का संरक्षण और संवर्धन न केवल औषधियों के लिए कच्चा माल उपलब्ध कराता है, बल्कि पर्यावरण संतुलन बनाए रखने में भी अहम भूमिका निभाता है।
उन्होंने यह भी कहा कि औषधीय पौधों की खेती किसानों की आय बढ़ाने का सशक्त माध्यम बन सकती है। इससे मृदा स्वास्थ्य और जैव विविधता के संरक्षण में भी मदद मिलती है। इस प्रकार आयुष पद्धतियों को बढ़ावा देना केवल स्वास्थ्य के लिए ही नहीं, बल्कि आर्थिक और पर्यावरणीय दृष्टि से भी लाभकारी है।
राष्ट्रपति मुर्मु ने कहा कि आज दुनिया एकीकृत चिकित्सा प्रणाली के महत्व को पहचान रही है। रोगों की रोकथाम और संतुलित जीवनशैली के लिए वैश्विक स्तर पर योग को अपनाया जा रहा है। आयुर्वेदिक उपचारों और औषधियों के प्रति भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर रुचि बढ़ी है। उन्होंने कहा कि तनावमुक्त और स्वस्थ जीवन के लिए आयुष प्रणालियां प्रभावी मार्गदर्शन प्रदान करती हैं।
उन्होंने आयुष प्रणालियों की वैज्ञानिक मान्यता को और मजबूत करने पर जोर दिया। साक्ष्य-आधारित अनुसंधान, औषधियों का मानकीकरण और गुणवत्ता नियंत्रण जैसे कदम इन प्रणालियों की विश्वसनीयता बढ़ाएंगे। राष्ट्रपति ने प्रसन्नता व्यक्त की कि आयुष मंत्रालय इस दिशा में निरंतर प्रयास कर रहा है और अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप दिशानिर्देश स्थापित किए जा रहे हैं।
अंत में राष्ट्रपति ने विश्वास जताया कि आधुनिक विज्ञान, नवाचार और वैश्विक सहयोग के साथ पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों को अधिक सुलभ और लोकप्रिय बनाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में आयुर्वेद, योग और अन्य आयुष पद्धतियां समग्र स्वास्थ्य देखभाल प्रणाली का अभिन्न हिस्सा बनेंगी।